
स्कूलों में नहीं चलेगी राजनीति! NSUI ने DEO को सौंपा ज्ञापन, छात्र संगठनों की सदस्यता और शुल्क वसूली पर तत्काल रोक लगाने की मांग”
18 वर्ष से कम उम्र के विद्यार्थियों को राजनीतिक गतिविधियों में शामिल किए जाने पर जताई आपत्ति, सभी हायर सेकेंडरी स्कूलों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी करने की मांग।

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, 27 जुलाई।जिले के शासकीय हायर सेकेंडरी विद्यालयों में छात्र संगठनों की बढ़ती राजनीतिक गतिविधियों को लेकर भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को ज्ञापन सौंपकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। NSUI विधानसभा अध्यक्ष आशीष श्रीवास के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि कुछ छात्र संगठन विद्यालय परिसर के भीतर प्रवेश कर विद्यार्थियों को अपनी सदस्यता दिलाने, उनसे शुल्क वसूलने तथा नाबालिग छात्रों को भी राजनीतिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे विद्यालयों का शैक्षणिक वातावरण प्रभावित हो रहा है।
ज्ञापन में कहा गया है कि विद्यालय शिक्षा का केंद्र है, जहां विद्यार्थियों का उद्देश्य केवल अध्ययन, अनुशासन और व्यक्तित्व विकास होना चाहिए। लेकिन हाल के दिनों में कुछ संगठनों द्वारा स्कूल परिसर में राजनीतिक गतिविधियां संचालित किए जाने से विद्यार्थियों का ध्यान पढ़ाई से भटक रहा है। विशेष रूप से 18 वर्ष से कम आयु के छात्रों को सदस्यता अभियान में शामिल करना उनके मानसिक, नैतिक और शैक्षणिक विकास के लिए अनुचित है।

NSUI ने जिला शिक्षा अधिकारी से मांग की है कि जिले के सभी हायर सेकेंडरी विद्यालयों के प्राचार्यों को स्पष्ट और सख्त निर्देश जारी किए जाएं ताकि विद्यालय परिसर के भीतर किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जा सके। साथ ही किसी भी छात्र संगठन को स्कूल परिसर में प्रवेश कर सदस्यता अभियान चलाने, विद्यार्थियों से संपर्क करने अथवा किसी प्रकार का शुल्क वसूलने की अनुमति न दी जाए।
ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि यदि कोई छात्र संगठन विद्यार्थियों से संपर्क करना चाहता है तो उसे विद्यालय परिसर के बाहर ही अपनी गतिविधियां संचालित करने की अनुमति दी जाए, ताकि स्कूल का शैक्षणिक माहौल पूरी तरह सुरक्षित और निष्पक्ष बना रहे।

NSUI विधानसभा अध्यक्ष आशीष श्रीवास ने कहा कि विद्यालय राजनीति का मंच नहीं बल्कि शिक्षा का मंदिर है। छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का राजनीतिक प्रयोग स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि विद्यालय परिसरों में इस प्रकार की गतिविधियों पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले समय में विद्यार्थियों की पढ़ाई और अनुशासन दोनों प्रभावित होंगे। संगठन ने प्रशासन से इस मामले में शीघ्र कार्रवाई कर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला शिक्षा विभाग इस ज्ञापन पर क्या निर्णय लेता है और क्या वास्तव में जिले के सभी विद्यालयों में राजनीतिक गतिविधियों को लेकर कोई नई गाइडलाइन जारी की जाती है। यह मुद्दा आने वाले दिनों में शिक्षा और छात्र राजनीति के बीच संतुलन को लेकर जिले में नई बहस को जन्म दे सकता है।















